मिली चौबे ने पुराने फ्रिज से यूवी चैंबर का किया निर्माण

भोपाल। कबाड़ के फ्रिज को यूवी चेम्बर में कन्वर्ट किया रायपुर के अम्बेडकर अस्पताल में बायोमेडिकल इंजीनियर मिली चौबे ने। अगर भीड़ से कुछ अलग करने की कोई व्यक्ति ठान ले तो हर असंभव कार्य को संभव किया जा सकता है। लगन व परिश्रम अपने कार्य के प्रति ईमानदारी से समर्पण भाव होना चाहिए। जी हां हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में विगत 10 वर्षों संविदा के पद पर कार्यरत बायोमेडिकल इंजीनियर मिली चौबे की जिन्होंने अपनी योग्यता का परिचय उस समय दिया जब देश कोरोना जैसी महामारी से संघर्ष कर रहा है। कोरोना से संक्रमित मरीजों के लिए हर संभव उचित व्यवस्था में देश प्रदेश की सरकारे व सभी डॉक्टर अस्पताल लगे हुए हैं। ऐसी परिस्थिति में अपने अस्पताल में अपनी तकनीकी से उपकरण तैयार किया है।  बायोमेडिकल इंजीनियर मिली चौबे ने खराब फ्रिज को यूवी चैम्बर में कन्वर्ट किया है उल्लेखनीय है कि मिली चौबे ने अभी कुछ दिन पहले ही 18 बेड के 9 आइसोलेशन वार्ड  तैयार किए जो कि अस्पताल के खराब उपकरणों के पार्ट्स को जोड़कर बनाये थे, वहीं कई उपकरण जो ठीक नहीं होने की स्थिति में थे उन्हें सही किया जिससे हॉस्पिटल में कोरोना के मरीजों का इलाज हो रहा है। मिली चौबे का कहना है कि मानवीय सेवा से उन्हें आत्मसंतोष मिलता है इसीलिए इंजीनियरिंग के साथ उन्होंने इस फील्ड को चुना लगभग 10 साल हो गए इन कार्यों को करते हुए। इतने वर्षों में वे और उनकी टीम कई उपकरण बना चुके हैं लेकिन आश्चर्य की बात है कि इतने सराहनीय कार्य करने पर भी न किसी केंद्र सरकार न राज्य सरकार का ध्यान इनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों पर नहीं गया जिससे इन कार्यों को जो महत्व मिलता या जनता का फायदा होता वो न हुआ और मिली चौबे अभी भी 24 घंटे मरीजों और राष्ट्र की सेवा कर रही हैं। सही मायनों में वो और उन जैसे लोग ही इस देश के अनमोल स्तम्भ हैं।


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