पूर्व मुख्यमंत्री की सलाह व भरोसा ले डूबा कमलनाथ सरकार को

 उपेक्षा और अहसान के भेंट चढ़ गई कांग्रेस या कोई साजिस-


भोपाल।आज सिंधिया जी कांग्रेस छोडकर बीजेपी के सदस्य जे साथ वहां पर सम्मान में राज्यसभा सदस्य के लिए नाम की घोषणा भी हो गई। यह उनको सम्मान देना ही है जो बीजेपी में पूर्व मुख्यमंत्री की शह पर वर्तमान मुख्यमंत्री ने अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उस अपमान का अहसास दोनों को समझ आ गया होगा। यहां सबसे बड़ी भूल कमलनाथ ओर दिग्विजय सिंह की रही उनका सोचना था कि सिंधिया कहीं नहीं जा सकते और अगर जाएगे तो उनके साथ कोई नहीं जाएगा। आज कमलनाथ को अहसास हो रहा होगा कि किस मूर्ख पर भरोसा कर लिया। जिससे जनता खुद पसन्द नहीं करती व कभी प्रदेश में  किसी भी पद पर बैठता हुआ नहीं देखना चाहती है। अब कमलनाथ को समझ आ गया होगा कि जमीन्दार ओर महाराज में कितना फर्क होता है ।अब बात की जसए की सिंधिया जी ने अचानक कैसे पसर्टी बदलने का निर्णय ले लिया । पूर्व केंद्रीय नंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की कांग्रेस से इस्तीफे का  निर्णय काफी समय पहले ले चुके थे! वर्तमान मेंं जो हुआ वह उस निर्णय पर अमल करना या। उसकी वजह कांग्रेस की मध्य प्रदेश में सरकार बनने के बाद लगातार हो रही उपेक्षा, अपमान और सिधिंया को में.प्र. की राजनीति से हमेशा बहार रखने की साजिश किस के द्धारा की जा रही थी! इसे समझना होगा?


मप्र में 15 साल जब काग्रेस की सरकार नही थी और जनता की लडाई श्री सिधिंया लड रहे थे तब इन 15 सालों में कमलनाथ कहाँ थे । छिन्दवाड़ा छोडकर अगर किसी जिले में जाकर कोई जनता की लडाई लडी हो तो बताये। चुनाव के समय जब कांग्रेस की सरकार बनती नजर आयी तो कुछ नेताओ ने क्योंकि वो खुद कांग्रेस के बुरे समय में 10 साल मप्र की राजनीति से संयास ले गये थे और उन्हे कमलनाथ का पूराना अहसान चुकाना था क्योंकि जब हाई कमान राजीव गाँधी, माधव राव सिधिंया को मप्र का मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे उस समय कमलनाथ की वजह से ही दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री बने थे! इस बार दिग्विजय सिंह ने उस अहसान को चुका दिया। जबकि पुरे प्रदेश की जनता ये सोचकर बैठी थी कि यदि कांग्रेस की सरकार बनती तो  ज्योतिरादित्य सिधिंया ही मुख्य मंत्री होगे.और इसी वजह से कांग्रेस को ग्वालियर अंचल और मप्र में सीटे मिलने के बाद भी श्री सिधिंया को मुख्यमंत्री नही बनने दिया यह सबसे पहला अपमान था दुसरा कमलनाथ मुख्यमंत्री बन गये तो श्री सिधिंया को कहा गया कि लोकसभा के चुनाव हो जाने दो इसके बाद आपको मप्र का कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया जायेगा जब बनाने की बात आयी तो 10 लोगों को लाईन में खडा कर दिया ये यहां भी अपमान मिला। लोकसभा के लिए दो नैताओं को भेजने का ,एक तो पहले से दिग्विजय सिंह तय थे दुसरा नाम था ज्योतिरादित्य सिधिंया का तो इन्हें काटने के लिए धूर्तो ने प्रियंका वाड्रा का नाम रख दिया यै यहां भी अपमान मिला। इसके बाद जब श्री सिधिंया ने किसानों, और शिक्षको के हक की लडाई का ऐलान किया तो इसी ग्वालियर में मुख्य मंत्री कमलनाथ ने ग्वालियर एयर पोर्ट पर प्रेस ने जब पूछा की श्री सिधिंया ने कांग्रेस के वचन पत्र पर सरकार काम नही करेगी तो जनता के साथ सडको पर उतरेंगे तब कमलनाथ ने बडे घमंड भरे शब्दो में श्री सिंधिया का तिरस्कार करते हुये कहा कि उन्हे किसने रोका है सडक पर जब चाहे उतर जाये कांग्रेस की सरकार पर कोई असर नही पडने वाला, यह उनका चौथा और असहनीय अपमान था जो सिधिंया परिवार की गरिमा के खिलाफ था! 


यही वजह उनके कांग्रेस छोडने की बनी।


 


साभार। सच्चाई की आवाज


 


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