मनुष्य को राग और द्वेष दोनों से बचना चाहिए: प्रज्ञानानंद

 

 सिवनी। राग-द्वेष मनुष्य को दृष्टिहीन बना देते हैं। मनुष्य को राग और द्वेष से बचना चाहिये । मनुष्य को जब किसी के प्रति राग हो जाता है तो मनुष्य को उसके अवगुण दिखाई नहीं देते। वह उस व्यक्ति का अंधभक्त बन जाता है और इसी प्रकार जब किसी के प्रति मनुष्य का द्वेष बढ़ जाता है तो वह उसके गुणों की ओर ध्यान नहीं देता केवल उसके दोष दिखाई देते है । इसलिये मनुष्य को राग द्वेष से बचना चाहिये । मोहगांव में चल रहे शिव पुराण महोत्सव के दौरान आज भगवान शिव की बारात अगवानी का प्रसंग सुनाते हुए निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानानंद गिरी द्वारा श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये गये । 

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