कोलार पाइप लाइन के नाम पर भ्रष्टाचार हजारों गैलन पानी हो रहा बर्बाद, निगम को करोड़ों का चूना

भोपाल। कोलार पाइप लाइन फूटने से हजारों गैलन पानी बर्बाद हो रहा है...लीकेज से रोजाना कई एमजीडी पानी बह रहा है...एकाध दिन नहीं, आए दिन ऐसी खबरें आती रहती हैं और नगर निगम को करोड़ों का नुकसान होता है। वहीं हजारों लोग पानी को भी तरसते हैं। नई पाइप लाइन डाले जाने का काम जानबूझकर धीमा चलाया जा रहा है, ताकि मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए का भ्रष्टाचार किया जा सके। अधिकारियों की मिलीभगत के चलते करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद कोलार पाइप लाइन के लीकेज बंद नहीं हो पा रहे हैं। नगर निगम की हालत यह है कि यहां पीएचई के अधिकारियों को पानी के बजाय दूसरे काम में लगा रखा है। 

कोलार और बड़े तालाब से होने वाली सप्लाई आए दिन प्रभावित हो रही है। शहर में सुचारू जल प्रदाय के लिए एक तरफ टाटा कंपनी द्वारा पाइप लाइन बिछाई जा रही है, दूसरी ओर कोलार से शहर तक पानी लाने वाली पाइप लाइन भी दूसरी बिछ रही है। लेकिन दोनों ही काम बहुत धीमी गति से चल रहे हैं। इसके चलते जो लीकेज हो रहे हैं, उससे रोजाना उतना पानी बह रहा है, जितना चार लाख लोगों को प्रदाय किया जा सकता है। हर महीने आठ से दस दिन तक शहर के कई हिस्सों में जल प्रदाय बंद भी करना पड़ जाता है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कोलार, बड़ा तालाब से रोजाना करीब 13 एमजीडी पानी लीकेज व अन्य कारणों से बहकर बर्बाद हो रहा है। इतने पानी को बचाकर 4 लाख आबादी की प्यास बुझाई जा सकती है। अकेले कोलार पाइप लाइन से 25 प्रतिशत पानी केवल लीकेज से बर्बाद हो जाता है।

कोलार फिल्टर प्लांट से शहर तक मौजूदा 35 साल पुरानी पाइप लाइन की जगह नई पाइप लाइन को बिछाने का काम लगातार पिछड़ता जा रहा है। अमृत योजना के तहत नई पाइप लाइन बिछाने के लिए 136 करोड़ रुपए की लागत से नवंबर-2018 में काम पूरा किया जाना था। निगम ने टाटा प्रोजेक्ट्स को इसका जिम्मा सौंपा था। लेकिन अब तक करीब दो तिहाई काम ही हो पाया है। अप्रैल-2017 

में इस प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया था। इस योजना के तहत कोलार की करीब 60 किमी पाइप लाइन बदली जानी थी लेकिन काम पिछड़ गया। निगम द्वारा कंपनी को तीन महीने अतिरिक्त मोहलत दी गई थी। इस हिसाब से फरवरी 2019 तक काम पूरा होना था, लेकिन इसके एक साल बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है। कई बार नोटिस देने के बताया जा रहा है कि निगम द्वारा एजेंसी को एक करोड़ रुपए जुर्माना का नोटिस भी दिया गया है। मुश्किल ये है कि जून के बाद बारिश चालू हो जाएगी, ऐसे में पाइप लाइन के लिए प्रोजेक्ट और पिछड़ेगा।

बता दें कि कोलार पाइप लाइन 35 साल पुरानी हो चुकी है। पाइप लाइन की क्षमता रोजाना 34 एमजीडी सप्लाई के लिए डिजाइन की गई है, लेकिन इन दिनों 36 एमजीडी पानी लिया जा रहा है। पुरानी पाइप पानी का प्रेशर नहीं झेल पाती। जिससे आए दिन लीकेज की समस्या हो रही है। लीकेज में जनता के हिस्से का रोजाना 15 एमजीडी तक पानी बहकर बर्बाद हो जाता है। अधिकारी बताते हैं कि कोलार से 36 एमजीडी पानी लिया जा रहा है, इसका लगभग 25 प्रतिशत लीकेज हो जाता है, जो 9 एमजीडी होता है। इसी तरह तालाब से 20 एमजीडी और नर्मदा से 38 एमजीडी पानी लिया जाता है। इनमें से 3 से 4 एमजीडी पानी की बर्बादी होती है। इस तरह करीब 12 एमजीडी पानी बर्बाद हो जाता है। 5 करोड़ 85 लाख लीटर पानी बर्बाद होता है। एक दिन में प्रति व्यक्ति की जरूरत 135 लीटर होती है। इस तरह 4 लाख से अधिक लोगों के हिस्से का पानी बर्बाद हो जाता है। 

नगर निगम में जल कार्य का कार्य एआर पवार देख रहे हैं। पवार चार साल से प्रभारी हैं, लेकिन वह न तो लीकेज ठीक कर पा रहे हैं और न ही पाइप लाइन बिछाने के काम में तेजी लाई जा सकी है। इसमें चार साल के दौरान लाखों रुपए बर्बाद हो चुके हैं, वहीं शहर में ठीक से जल प्रदाय भी नहीं हो पा रहा है। नगर निगम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के अधिकारियों को जल प्रदाय के कार्य के लिए भेजा जाता है, लेकिन कई अधिकारियों को दूसरे काम सौंप दिए जाते हैं। सहायक यंत्री बृजराज सिंह सेंगर को कोलार जल प्रदाय के साथ ही वर्कशाप का भी प्रभारी बना दिया गया है। वह दिन भर वर्कशाप में ही व्यस्त रहे हैं, कोलार का काम देखने  का समय ही नहीं मिल पा रहा है। सेंगर पीएचई विभाग से आए हैं और पेयजल का काम सौंपा गया था, लेकिन वह सिफारिश के आधार पर वर्कशाप के प्रभारी बन गए हैं। वहां भी करोड़ों का घोटाला हो चुका है और सैकड़ों लीटर डीजल आज भी चोरी हो रहा है। यह हेराफेरी बड़े पैमाने पर हो रही है। पूर्व नगर निगम आयुक्त छवि भारद्वाज ने बड़ा घोटाला पकड़ा था, तत्कालीन प्रभारी को हटा तो दिया, लेकिन जांच रिपोर्ट दबा दी गई। उप नगर यंत्री के पद पर पीएचई से आए शैलेंद्र श्रीवास्तव को पदस्थ कर रखा है, जबकि उन्हें जल कार्य का प्रभार दिया जाना था। उनसे सिविल का कार्य लिया जा रहा है। वर्तमान निगम आयुक्त को कुछ अधिकारियों द्वारा लगातार भ्रमित किया जा रहा है, जिसके चलते शहर में जल कार्य प्रभावित हो रहा है और करोड़ों रुपए का निगम को घाटा भी हो रहा है। इस संबंध में प्रभारी एआर पवार से चर्चा करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे चर्चा नहीं हो सकी। 

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