इण्डियन स्ट्रोक एसोसिएशन ने लॉन्च किया स्ट्रोक एसओएस ऐप

नज़दीकी सूचीबद्ध अस्पतालों का पता लगाने में मदद करेगा

नई दिल्ली। इण्डियन स्ट्रोक एसोसिएशन ने एमरजेन्सी स्थिति में स्ट्रोक के मरीज़ों की मदद करने के लिए स्ट्रोक एसओएस ऐप का लॉन्च किया है। इस ऐप के ज़रिए मरीज़ / देखभाल करने वाले लोग ऐसे नज़दीकी अस्पतालों का पता लगा सकेंगे जो स्ट्रोक के इलाज में अग्रणी हैं, साथ ही उनसे सहायता के लिए अनुरोध भी करस केंगे। इस ऐप के ज़रिए उपयोगकर्ता मैप की मदद से चुनिंदा अस्पताल को नेविगेट कर सकेंगे।

वर्तमान में उपलब्ध स्ट्रोक ऐप्स स्ट्रोक रीहेबिलिटेशन, चिकित्सा पेशेवरों को शिक्षित करने, स्ट्रोक से जुड़े जोखिम का मूल्यांकन करने तथा स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को ज़रूरी जानकारी प्रदान करने एवं लोगों के लिए कस्टमाइज़्ड

रीहेबिलिटेशन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इण्डियन स्ट्रोक एसोसिएशन में हमने ऐसे ऐप की आवश्यकता महसूस की जो अखिल भारतीय स्तर पर मरीज़ों एवं एमरजेन्सी देखभाल के बीच के अंतर को दूर सके। डॉ विनीत सूरी, प्रेज़ीडेन्ट, इण्डियन स्ट्रोक एसोसिएशन, सीनियर कन्सलटेन्ट न्यूरोलोजिस्ट इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा स्ट्रोक एक मेडिकल एमरजेन्सी होती है, जिसमें ब्लॉक हो चुकी वाहिका में सर्कुलेशन को बहाल करने के लिए तुरंत इंट्रावीनस थ्रोम्बोलाइसिस या मेकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी किया जाता है। दुर्भाग्य से भारत में सिर्फ 1-5 फीसदी

मरीजों को ही यह इलाज समय पर मिल पाता है, इसका मुख्य कारण है जागरुकता की कमी और स्ट्रोक को ना पहचान पाना । इसके अलावा अक्सर समय रहते यह फैसला नहीं लिया जा सकता कि स्ट्रोक होने पर कौन सा इलाज दिया जाए। यह ऐप्लीकेशन स्ट्रोक एसओएस मरीज़ों को आपातकालीन स्थिति में मदद करता है। यह यूजऱ की लोकेशन को ट्रैक करता है, स्ट्रोक के आम लक्षणों के बारे में जानकारी देता है तथा नज़दीकी अस्पताल के बारे में जानकारी देता है जहां स्ट्रोक मैनेजमेन्ट किया जा सके। यह अस्पताल का कॉन्टेक्ट नंबर उपलब्ध कराता है और गूगल मैप पर मरीज़ को नेविगेट करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज़ जल्द से जल्द अस्पताल पहुंच सके। स्ट्रोक दुनिया भर में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है, हर दो सैकण्ड में स्ट्रोक का एक मामला आता है और हर 6 सैकण्ड में इसके कारण 1 व्यक्ति की जान चली जाती है। दुनिया भर में 4 में से एक व्यक्ति को अपने जीवन में स्ट्रोक का सामना करना पड़ता है। स्ट्रोक के 80 फीसदी मामलों की रोकथाम संभव है अगर मरीज़ को गोल्डन आवर के अंदर इलाज दिया जाए । ऐसे में स्ट्रोक एसओएस जैसे ऐप स्वास्थ्य सेवा उद्योग के लिए समय की मांग हैं।

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