भारत में आग के 42 फीसदी से अधिक मामले दोापूर्ण इलेक्ट्रिक सिस्टम:केईआई

आग से सुरक्षा- केईआई इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड


 देश में आग जनि के  मुख्य कारण होते हैं- ढीली या गलत वायरिंग, अच्छे स्टैण्डर्ड की इलेक्ट्रिक फिटिंग न होना और वायरिंग का सही-रखरखाव न होने के कारण ाॉर्ट-सर्किट। भारतीय वाणिज्य संघ (आईसीए) के मुताबिक बिजली की वजह से होने वाली आग दुर्घटनाओं के एक चौथाई मामलों में कोड का उल्लंघन, सर्किट का खराब डिज़ाइन और वायर का अनुपयुक्त साइज़ ही मुख्य कारण होते हैं। इसके अलावा, जिन भी संरचनाओं में आग दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, उनमें से 35 फीसदी मामले पुरानी इमारतों में हुए हैं। ज़्यादातर पुरानी इमारतों में वायरिंग को अपग्रेड नहीं किया जाता। ऐसे में ज़्यादा लोड, पुराने इन्सटॉलेान, खराब इंसुलेान एवं उचित रखाव न होने के कारण आग जैसी दुर्घटनाएं हो जाती हैं। हालांकि यह सूची यहीं पर खत्म नहीं होती और यही कारण है कि केईआई इंडस्ट्रीज़ जैसी वायर एण्ड केबल कंपनियां इलेक्ट्रिक सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित करती हैं। 
अग्नि सुरक्षा के लिए केबल
आग दुर्घटना के सभी मामलों में सुरक्षित निकासी में कुछ मुख्य बाधाएं होती हैं जैसे आग के कारण धुंआ, गर्मी और विौला धुंआ। इन खतरों से बचने के लिए फायर रेज़िस्टेन्ट एवं नॉन-हैलोजेनेटेड केबल्स का इस्तेमाल करना चाहिए। फायर रेज़िस्टेन्ट केबल ऐसे केबल हैं जिनके इस्तेमाल से आग के मामले में भी एमरजेन्सी उपकरण काम करते रहते हैं जैसे एक्ज़िट डोर लाइटिंग, एक्ज़हॉस्ट फैन आदि। इसके लिए कंडक्टर पर हीट बैरियर टेप की कई परतों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि बड़ी आग दुर्घटना के मामले में भी सर्किट न टूटे। केईआई केे फायर रेज़िस्टेन्ट केबल इसी तरह से डिज़ाइन किए गए हैं ताकि आग लगने पर सर्किट की अखंडता बनी रहे और इमारत में से लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके, साथ ही आग के कारण विौली गैसों और धुएं का प्रभाव न हो। 
दूसरी ओर, फ्लेम रिटार्डेन्ट केबल वे केबल हैं जो आग को एक निचित सीमा तक फैलने से रोकते हैं। इसके अलावा थ्त्स्ैभ् -फ्लेम रिटार्डेन्ट लो स्मोक केबल से धुंआ भी कम निकलता है। 
 फ्लेम रिटार्डेन्ट केबल नए क्षेत्र में आग को फैलने से रोकते हैं, जबकि फायर रेज़िस्टेन्स केबल सर्किट को टूटने नहीं देते, जिससे निर्दिट समय तक कथित परिस्थितियों में उपकरण काम करते रहते हैं। दोनों के बीच अंतर बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि जटिल सर्किट के मामलों में प्लांट को तुरंत ाट डाउन करना और जीवन को सुरक्षित रखना ही प्राथमिकता होती है। इसकेे अलावा, फ्लेम रिटार्डेन्ट केबल, आग के मामले में अपना काम जारी नहीं रखते, और आग के दौरान सर्किट की अखंडता बनी रहने की संभावना नहीं रहती। 
जबकि सामान्य केबल, वे केबल हैं, जिनमें सिर्फ इसी बात पर ध्यान दिया जाता है कि सर्किट में करेन्ट का प्रवाह रहे, एमरजेन्सी स्थिति जैसे आग आदि पर ध्यान नहीं दिया जाता। 


ग्रीन वायर और इसके फायदे
इलेक्ट्रिक सर्किट को ग्राउण्ड यानि ज़मीन से जोड़ना ग्रीन वायर का मुख्य प्रयोजन होता है। ये ग्राउण्डिंग टर्मिनल को एक आउटलेट बॉक्स में कनेक्ट करते हैं और इलेक्ट्रिक पैनल में ग्राउण्ड बस बार पर काम करते हैं। इस तरह, ग्रीन वायर सर्किट को अधिक सुरक्षित बनाते हैं, अगर सर्किट की लाईव वायर किसी मैटल या अन्य कंडक्टर के संपर्क में आ जाए तो ये बिजली को ज़मीन में भेज देते हैं। 


उपयोग के आधार पर फायर रेज़िस्टेन्ट और फ्लेम रिटार्डेन्ट दोनों तरह की तारों को ‘‘ग्रीन वायर’’ की श्रेणी में रखा जा सकता है, क्योंकि दोनों त्वभ्ै  कम्प्लायन्ट हैं। इसके अलावा इंडोर जैसे घर के अंदर, सार्वजनिक इमारतों जैसे कॉन्क्रीट हॉल, मॉल, थिएटर आदि के लिए फ्लेम रेज़िस्टेन्ट/ थ्त्स्ै / ज़ीरो हैलोजन लो स्मोक वायर को प्राथमिकता दी जाती है और खुले सार्वजनिक स्थानों के लिए फ्लेम रिटार्डेन्ट वायर को प्राथमिकता दी जाती है। 
     


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PRAJA PARKHI: भारत में आग के 42 फीसदी से अधिक मामले दोापूर्ण इलेक्ट्रिक सिस्टम:केईआई
भारत में आग के 42 फीसदी से अधिक मामले दोापूर्ण इलेक्ट्रिक सिस्टम:केईआई
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