बेंगलुरु के वैज्ञानिक का दावा, बनाया ऐसा गैजेट जो कोरोना वायरस को फैलने से रोकेगा : दीपा बालकृष्णन

बेंगलुरु। चीन (China) से फैले कोरोना वायरस (Coronavirus) का अभी तक कोई इलाज खोजा नहीं जा सका है. इन सबके बीच अलग-अलग देशों में वैक्सीन की खोज हो रही है. माना जा रहा है कि इसकी वैक्सीन कम से कम एक साल के बाद आएगी. वास्तव में अभी तक इस रोग के बारे में वैज्ञानिक भी ज्यादा नहीं जान पाये हैं और अभी भी इस पर शोध हो रहा है. इस वायरस के बारे में सिर्फ एक ही चीज पता है कि यह वायरस बहुत, बहुत तेजी से फैलता है.


कर्नाटक स्थित बेंगलुरु में एक मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च यूनिट ने दावा किया है कि उसने एक गैजेट का प्रोटो टाइप तैयार किया है जो वायरस के प्रसार को न्यूट्रलाइज कर सकता है.
यह प्रोटोटाइप इस हफ्ते अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड में टेस्ट करने के लिए भेजा गया है. संस्थान के चेयरमैन डॉक्टर राजह विजय कुमार ने कहा कि जो गैजेट तैयार किया जा रहा है जो घर, ऑडिटोरियम, ऑफिस, स्कूल, कार... हर जगह रखा जा सकता है। यह गैजेट कम से कम आपको प्रभावित नहीं होने देगा..... उन्होंने कहा कि यह गैजेट पहले से संक्रमित लोगों का इलाज नहीं कर पाएगा लेकिन यह दावा किया कि वायरस आगे प्रसार नहीं कर पाएगा. News18.com को उन्होंने बताया कि अगर आप एक कमरे में किसी कोविड-19 संक्रमित शख्स के साथ है तो यह गैजेट कम से कम आपको प्रभावित नहीं होने देगा


डिवाइस के बारे में कुमार ने दावा किया कि यह एक न्यूट्रलाइजर की तरह काम करता है. ऐसे में कोई भी जो वायरस के संपर्क में आएगा , उदाहरण के लिए टेबल-कुर्सी जिस पर वायरस है वह उससे प्रभावित नहीं होगा। इसके पीछे का विज्ञान समझाते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना वायर एक स्पाइर बॉल की तरह है जिसमें कई स्पाइक्स हैं जिसे S-Protein कहा जाता है. उन्होंने कहा कि ये प्रोटीन्स के पास पॉजिटिव सेल्स होते हैं और इन्हें निगेटिव की जरूरत होती है, जब आपका शरीर वायरस के संपर्क में आता है तो आपके शरीर में जाता है और क्योंकि सेल्स में निगेटिव पोटेंशियल होता है इशलिए वह उनमें तिपक जाते हैं और इसका डीएनए छोड़ने लगते हैं और रेप्लकैट करने लगते हैं. और इस तरह से यह वायरस काम करने लगता है। उन्होंने दावा किया कि 'यह गैजेट जो हमने विकसित किया है यह बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनों को रिलीज़ करता है - ये वायरस आपके शरीर या अन्य के इलेक्ट्रॉनों के बीच अंतर नहीं जानते हैं. एक बार जब इलेक्ट्रॉनों को छोड़ दिया जाता है, तो वायरस सेल्स बेअसर हो जाती हैं. कोई भी संक्रमित व्यक्ति आता है - अगर वह कुछ छूता है, तो ये इलेक्ट्रॉन सभी वायरल इलेक्ट्रॉनों को बेअसर कर देंगे. उसके बाद, भले ही आप इसे निगलना चुके हो, यह प्रोटीन के एक टुकड़े के रूप में आपके पेट में चला जाता है, लेकिन नुकसान नहीं पहुंचाता.। यदि प्रोटोटाइप को यूएस में वितरित किया जा सकता है, तो इसकी क्षमता को मान्य करने में लगभग चार से पांच दिन लगेंगे. प्रयोगशालाओं को निर्धारित करना होगा कि इलेक्ट्रॉनों कितनी दूर तक जाते हैं, यह किस दूरी पर काम कर सकता है. साथ ही खुले या ढके क्षेत्र में स्टील आदि जैसी विभिन्न सतहों पर कैसे काम करता है।


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PRAJA PARKHI: बेंगलुरु के वैज्ञानिक का दावा, बनाया ऐसा गैजेट जो कोरोना वायरस को फैलने से रोकेगा : दीपा बालकृष्णन
बेंगलुरु के वैज्ञानिक का दावा, बनाया ऐसा गैजेट जो कोरोना वायरस को फैलने से रोकेगा : दीपा बालकृष्णन
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