बड़े तालाब का मामला,,,,, 38 वर्ग किलो मीटर की जगह मास्टर प्लान में 4 वर्ग किमी कम

भोपाल ।  राजधानी की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब का आकार 38 वर्ग किलो मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। जबकि, शहर के व्यवस्थित विकास व तालाब संरक्षण के दावे के साथ तैयार किए गए मास्टर प्लान 2031 में तालाब के आकार को 4 वर्ग किमी कम दिखाया गया है। मतलब मास्टर प्लान में तालाब संरक्षण का खाका 34.84 वर्ग किमी के आधार पर तय किया गया है। दरअसल, यह काम भी तालाब को खत्म कर रहे अतिक्रमणों को वैध करने की मंशा से किया गया है। बड़े तालाब के चारों ओर छोटे-बड़े अतिक्रमणों की भरमार है। यहां करीब शह एक लाख अतिक्रमणों को वैध करने के लिए तालाब के एरिया को 4 वर्ग किमी कम करने का काम किया गया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि अतिक्रमणों व मास्टर प्लान को लेकर टीएंडसीपी ने कई बार नगरीय नहीं विकास एवं आवास विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम समेत कई सरकारी कर विभागों के साथ चर्चा की थी। इसके है। बाद भी तालाब की वास्तविक परिधि इस को लेकर आपत्ति नहीं की गई। अर्बन एक्सपर्ट व पर्यावरण विद् बताते हैं कि तालाब की परिधि व इससे लगे क्षेत्रों में 1 लाख से अधिक छोटे-बड़े निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किए गए हैं। बता दें कि जिला प्रशासन द्वारा तालाब के सर्वे में भी बड़े तालाब का विस्तार क्षेत्र 38 वर्ग किमी दर्शाया गया है। मामले पर कलेक्टर तरूण पिथोड़े ने बताया कि तालाब को लेकर टीएंडसीपी के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। तालाब संरक्षण के लिए हम हर स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। मास्टर प्लान में बड़े तालाब की सीमाओं को लेकर सुधार करने का निर्देश भी दिया था। तब सुनीता सिंह ने तालाब की परिधि को लेकर सुधार की बात. बीते साल नवंबर महीने में जिला योजना समिति की बैठक में मास्टर प्लान के प्रावधानों का प्रजेंटेशन दिया गया था। इस दौरान टीएंडसीपी की संयुक्त संचालक सुनीता सिंह ने बड़े तालाब की परिधि को 34 वर्ग किमी बताया था। इस पर बैठक | में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति ली कही थी, लेकिन शासन-प्रशासन की शह व नेताओं के कारण प्लान में बदलाव नहीं किया गया।
अनदेखी के पीछे यह है कारण


बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर दूर तक निर्माण कार्यों की अनुमति नहीं देने का प्रावधान है। अब तक इसी आधार पर अवैध निर्माण को चिन्हित करने या कार्रवाई का मापक माना गया क है। तालाब की परिधि को कम दिखाने से धे इसका विस्तार 4 वर्ग किमी कम हुआ है। कम हुई हदों से 50 मीटर में आने वाले निर्माणों को अवैध माना जाएगा। यदि इसे 38 वर्ग किमी के हिसाब से लेते तो हजारों निर्माण अवैध की श्रेणी में आ जाते । इस मामले को राजनीतिक दलों ने चुनावी मुद्दा भी बनाया था। इस अवैध निर्माण की श्रेणी में कई रसूखदारों के निर्माण भी आ रहे हैं।


 


 


साभार skp समाचार व्हाट्सएप ग्रुप


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