नगर निगम सतना में तालाब सफाई, सड़क व कचरे के प्रचार में लाखों का हो रहा है भ्रस्टाचार

सतना। नगर निगम आयुक्त व अन्य अधिकारियों की मिली भगत से  जनता के  लाखों रुपयों  को भ्रस्टाचार की बाली चढ़ाया जा र्ष है। कहीं तालाब, कहीं कचड़े के प्रचार के नाम पर लाखों रुपये की बाली दी जा रही है।  नगर निगम में भारी भ्रष्टाचार आयुक्त मूक दर्शक बने हुए हैं अवैध कॉलोनी में सड़क का निर्माण इंजीनियरों द्वारा बिना वर्क ऑर्डर सड़क बनवाई गई। सड़क बन जाने के बाद अब कैसे भुगतान किया जाए इस पर विचार विमर्श चल रहा है । वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचारियों के बीच शहर के तालाबों की सफाई के ऊपर भी लंबा भ्रष्टाचार किया गया है। सफाई कहीं नहीं हो रही है खाली बिल बन रहे हैं । जिस कार्य को करने के लिए  9 लाख रुपए में तालाब साफ करने का ठेका दिया गया । ज्वाला एनजीओ को  48 लाख रुपए का भुगतान किया गया। जो सतना में सिर्फ यह प्रचार कर रहा था गीला कचरा सूखा कचरा अलग अलग किया जाए। वहीं  ई टॉयलेट लगाए गए जो ₹5 लाख में एक खरीदा गए जिसे डॉक्टर यादव के घर के सामने ,दो टॉयलेट महामाया होटल के नीचे , दो टॉयलेट टेलीफोन एक्सचेंज के बाहर , स्टेशन रोड पर एक टॉयलेट लगाया गया जिस की सुविधा आज तक किसी ने नहीं ली । यह टॉयलेट मात्र कमीशन खाने के लिए लिया गया।  नगर निगम  के अधिकारियों और इंजीनियरों द्वारा पैसों की लूट मची हुई है और जनता के ऊपर संपत्ति कर बढ़ाया जा रहा है।नगर निगम के द्वारा संपत्ति कर के नाम पर लोगों की दुकानों व मकानों पर ताला लगाया जा रहा है। आश्रय शुल्क  जो करोड़ों में है उनको भू राजस्व संहिता के तहत क्यों नहीं वसूला जा रहा है उनके लिए अलग से परिवाद क्यों दायर किया जा रहा है। क्या उन्हें कोर्ट में जाकर लंबा समय खींचने का मौका नहीं दिया जा रहा है।बांधवगढ़ कॉलोनी में अवैध निर्मित मकान को लगभग 8 माह हो चुके हैं जिसमें माधव आईटीआई  संचालित हो रहा है। उसे बार-बार क्यों मौका दिया जा रहा है उसके विरूद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है । क्या आयुक के पास इसका कोई जवाब है।


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