गोल्डन फॉरेस्ट के प्रकरण में एक आरोपी एस.टी.एफ. की गिरफत में*


  भोपाल।  डॉ. अशोक अवस्थी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसटीएफ. मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा लंबित प्रकरणों को त्वरित निराकृत करने हेतु निर्देशित किया गया था।  विलोचन शुक्ला पुलिस अधीक्षक एस.टी.एफ. इन्दौर द्वारा बताया गया कि गोल्डन फॉरेस्ट इण्डिया लिमिटेड की सम्पूर्ण भारत वर्ष की भूमि के क्रय-विक्रय पर पर माननीय उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली द्वारा रोक लगाई गई थी। इसी क्रम में वर्ष 2017 में पंजीबद्व हुए गोल्डन फॉरेस्ट इण्डिया लिमिटेड की ग्राम पानदा के सर्वे नम्बर 315/3 रकबा 1.174 हेक्टेयर भूमि का अवैद्य क्रय-विक्रय करने वाले आरोपियों को एस.टी.एफ. द्वारा पूर्व में गिरफतार किया गया था। 
  इसी क्रम में प्रकरण की विवेचना के दौरान पाया गया कि, इन रजिस्ट्री में गवाह के तौर पर हस्ताक्षर करने वालो गवाहों द्वारा भी शासकीय भूमि के अवैद्य क्रय-विक्रय में सक्रिय सहभागिता निभाई गई है। ग्राम पानदा के उक्त सर्वे की रजिस्ट्री में गोपाल आंजना पिता भगवानसिंह आंजना निवासी ग्राम नावदा तहसील महूं जिला इन्दौर द्वारा गवाह के रूप में हस्ताक्षर किये थे जिसे एस.टी.एफ. टीम द्वारा आज गिरफतार किया गया है। 
  इसी रजिस्ट्री के दूसरे गवाह राजेन्द्र सिंह पिता शेरसिंह ठाकुर निवासी ग्राम पानदा जिला इन्दौर जो वर्तमान में थाना किशनगंज जिला इन्दोर पश्चिम के अपराध क्रमांक 155/16 धारा 279 337 304-ए 302 120-बी भादवि में गिरफतार होकर केन्द्रीय जेल जबलपुर मेें निरूद्व है कि औपचारिक गिरफतारी किये जाने की अनुमति माननीय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश महूं से अनुमति प्राप्त की गई है जिसे शीघ्र ही केन्द्रीय जेल जबलपुर जाकर औपचारिक गिरफतार किया जावेगा।  आरोपी की गिरफतारी में एस.टी.एफ. इन्दौर के उप निरीक्षक श्यामकिशोर त्रिपाठी, सउनि अमित दीक्षित, आरक्षक विवेक द्विवेदी, आशीष मिश्रा, सुभाष कोठे, भूपेन्द्र गुप्ता ओर सतीश चौहान की उल्लेखनीय भूमिका रही है।


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