एक साल में दहेज प्रताडऩा के 188 मामले दर्ज कड़े कानून के बाद भी दहेज के नाम पर आधे से अधिक झूठे मामले

भोपाल। दहेज प्रथा पर रोक लगाने के लिए कितने भी कड़े कानून बन जाएं, लेकिन इस में कमी नहीं आ रही है। राजधानी के महिला थाने में तीन साल में सबसे अधिक दहेज प्रताडऩा के मामले दर्ज हुए हैं। साल 2019 में कुल 203 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से 188 मामले तो सिर्फ दहेज प्रताडऩा के ही है। यानी एक साल में सबसे ज्यादा 92 प्रतिशत मामले सिर्फ ससुराल वालों के खिलाफ दहेज प्रताडऩा के दर्ज कराए गए हैं। इसके बाद दुष्कर्म और छेड़छाड़ के केस सामने आए हैं। इसमें छेड़छाड़ के 0.9 फीसदी व दुष्कर्म के 3.9 फीसदी प्रकरण दर्ज हुए हैं। वहीं तीन साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 617 केस महिला थाने में दर्ज हुए, जिसमें सबसे अधिक दहेज प्रताडऩा के 532 मामले हैं।

50 फीसदी से अधिक मामले झूठे-

काउंसलर्स रीता तुली ने बताया कि महिला थाने में जो भी महिलाएं मामला दर्ज कराने आती हैं वे परामर्श कराने की बजाय पति या ससुरालवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहती हैं। ऐसे मामलों में समझौता नहीं हो पाता। ऐसे में 99 फीसदी केस में तलाक हो जाते हैं। साथ ही दहेज प्रताडऩा के करीब 50 फीसदी से अधिक में झूठे निकलते हैं।

रीता तुली कहती हैं कि नेहरू नगर निवासी एक महिला ने महिला थाने में शादी के एक साल बाद ही ससुराल वालों के खिलाफ 20 लाख रुपये के दहेज की मांग को लेकर शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया कि शादी के बाद से ही रोज ससुराल वाले दहेज की मांग कर प्रताडि़त करते थे।

एक अन्य घटना का हवाला देते हुए वे बताती हैं कि कोलार निवासी एक महिला ने अपने पति के सामने शर्त रखी कि ससुराल वालों से अलग रहना चाहती है। वहीं पति ने अपने घरवालों से अलग रहने से इनकार किया तो महिला ने ससुराल वालों के खिलाफ शादी के 6 माह बाद ही 30 लाख रुपये का दहेज मांगने की शिकायत दर्ज करा दी।

इनका कहना है-

महिला थाने में जितने भी मामले आते हैं सभी में काउंसिलिंग की जाती है। अगर मामले में दोनों पक्षों की सुलह नहीं हो पाती है तो महिला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की जाती है। सबसे अधिक मामले दहेज प्रताडऩा के आते हैं।

अजिता नायर, प्रभारी महिला थाना


ज्यादातर मामलों में महिलाएं काउंसिलिंग कराना नहीं चाहती हैं। समस्या कुछ और होती है, लेकिन दहेज प्रताडऩा से जोड़कर केस दर्ज कराती हैं। ऐसे मामलों में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं होती है। ज्यादातार मामलों में मोबाइल पर पति-पत्नियों का सोशल मीडिया से जुड़े रहना एवं चेटिंग की शिकायतों पर विवाद होना सामने आ रहे हैं जिसमें नौबत तलाक तक भी पहुंच रही है। 

रीता तुली, वरिष्ठ काउंसलर, महिला थाना

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