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मप्र की अदालतों में 14 प्रतिशत कम जज

जजों के 2028 स्वीकृत पदों में से 294 पद रिक्त

भोपाल । भोपाल की जिला अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक में मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जजों की संख्या कम होने के कारण समय पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। इससे मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 11 दिसंबर 2023 की स्थिति में मध्य प्रदेश के जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में जजों के 2028 में से 294 (14 प्रतिशत) पद रिक्त थे। पूरे देश की बात करें तो स्वीकृत पदों की तुलना में 21 प्रतिशत कम न्यायाधीश हैं। गत दिनों भोपाल में संपन्न हुए न्यायाधीशों के सम्मेलन में जजों की कमी पर चिंता जताई गई। न्यायालयों में लंबित मुकदमों की संख्या बढऩे की बड़ी वजह हाई कोर्टों से लेकर जिला व अधीनस्थ न्यायालयों में जजों की संख्या स्वीकृत पदों से बहुत कम होने को माना गया है।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 11 दिसंबर 23 तक स्वीकृत पदों की तुलना में देश में 21 प्रतिशत कम जज हैं। उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 1247 और गुजरात में 545 जजों की कमी है। रिक्तियों के मामले में तीसरे नंबर पर बिहार, फिर तमिलनाडु और पांचवें स्थान पर मध्य प्रदेश है। इसी रिपोर्ट के अनुसार देश के हाई कोर्टों में 324 पद रिक्त हैं। विधि एवं न्याय मंत्रालय के राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड के अनुसार मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 4.47 लाख और जिला व अधीनस्थ न्यायालयों में 20 लाख से अधिक प्रकरण लंबित हैं। इसमें दो लाख, 69 हजार सिविल और एक लाख, 77 हजार क्रिमिनल केस हैं। प्रदेश के जिला व अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित 20 लाख 12 हजार मामलों में से 16 लाख 14 हजार क्रिमिनल और बाकी सिविल मामले हैं।

मप्र में जजों के 294 पद रिक्त

भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 11 दिसंबर 2023 की स्थिति में मध्य प्रदेश के जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में जजों के 2028 में से 294 (14 प्रतिशत) पद रिक्त थे। पूरे देश की बात करें तो स्वीकृत पदों की तुलना में 21 प्रतिशत कम न्यायाधीश हैं। उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 1247 और इसके बाद गुजरात में 545 की कमी है। रिक्तियों के मामले में तीसरे नंबर पर बिहार, फिर तमिलनाडु और पांचवें स्थान पर मध्य प्रदेश है। इसी रिपोर्ट के अनुसार देश के उच्च न्यायालयों में 324 पद रिक्त हैं, जिसमें मप्र में 13 हैं। प्रदेश के उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के स्वीकृत पद 53 हैं। पूर्व अध्यक्ष मप्र स्टेट बार काउंसिल शिवेंद्र उपाध्याय का कहना है कि हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। कम से कम 50 जज होने चाहिए। दूसरी बात यह कि उच्च न्यायालय में 14 सीट बढ़ी हैं, पर वह अभी तक नहीं मिली हैं। बार काउंसिल का अध्यक्ष रहते मैंने इसके लिए प्रयास भी किए थे। हालांकि, उत्तर प्रदेश व कुछ अन्य राज्यों की तुलना में हमारे प्रदेश की की स्थिति अच्छी है।

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